महाराजा मदरा मुण्डा केंद्रीय पड़हा समिति, सुतियाम्बेगढ़, यह एक सेवा संस्थान
और न्यास ट्रस्ट है, जिसका उद्देश्य सर्व समाज की सांस्कृतिक विरासत और पहचान को
संरक्षित करना है।
समिति का नाम महाराजा मदरा मुण्डा के नाम पर रखा गया है, जो छोटानागपुर
के
अंतिम मुण्डा महाराजा थे और सर्व समाज में उनका ऐतिहासिक योगदान रहा है।
समिति मुण्डा समाज और अन्य आदिवासी समुदायों तथा मूलवासियो के बीच धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक
जागरूकता को बढ़ावा देती है।
सुतियाम्बेगढ़ का ऐतिहासिक महत्व
सुतियाम्बेगढ़ रांची के पास स्थित एक ऐतिहासिक स्थान है, जो महाराजा मदरा मुण्डा की
राजधानी थी।
यह मुण्डाओं का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक गढ़ है, जहाँ मुण्डा समुदाय के लोग अपने
पूर्वजों
को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए इकट्ठा होते हैं।
सर्वप्रथम तो छोटानागपुर राजवंश की विरासत यहाँ के मूल शासक महाराजा मदरा
मुण्डा द्वारा प्रदत्त है, जिनका अपनी संतान मणिमुकुट राय और पौष पुत्र फणिमुकुट राय थे। योग्यता अनुसार महाराजा मदरा मुण्डा ने पौष पुत्र को अपने जीवनकाल में
राज संचालन की जिम्मेदारी दी थी। महाराजा मदरा मुण्डा के पूर्व 4 पीढ़ी ईसा पूर्व राज
किये। सुतियाम्बेगढ़ के प्रथम राजा सुतिया मुण्डा थे।